शहीद-ए-आजम हजरत इमाम हुसैन की शहादत को किया याद
रुड़की। शहादत की जो मिसाल हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में पेश की उसकी नजीर कयामत तक नहीं मिल पाएगी। क्योंकि किसी धर्म, समुदाय विशेष के लिए नहीं बल्कि पूरी मानव जाति की रक्षा के लिए अपनी उन्होंने अपने साथियों की कुर्बानी राहे खुदा को पेश की थी। चेहल्लुम की मुख्य मजलिस को संबोधित करते हुए मुस्लिम धर्मगुरु डॉ. मौलाना सय्यद काजिम मेहदी उरूज जौनपुरी ने कहा कि इमाम हुसैन के बताए मार्ग पर चलकर आज दुनिया में फैले आतंकवाद से लड़ा जा सकता है। बड़े इमामबाड़े से चेहल्लुम का मुख्य मातमी जुलूस शुरू हुआ। बाबुल मुराद पहुंचकर यहां से अजादार जुलूस में शामिल हो गए। यह जुलूस बारगाह-ए-जैनबिया पहुंचा। दरबारे हुसैन से बरामद जुलूस भी इसमें शामिल हो गया।
