समय रहते भी न चेते तो नई पीढ़ियों के लिए लोकभाषाएं इतिहास बनकर रह जाएंगी

देहरादून। लोकभाषाओं के संरक्षण व संवद्धन पर सरकारों, जन सरोकारों से जुड़ी संस्थानों व आमजन को भगीरथ प्रयास करने होंगे। आज कई लोकभाषाएं लुप्त होने के कगार पर हैं। यदि समय रहते भी न चेते तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह लोकभाषाएं मात्र इतिहास बनकर रह जाएंगी। यह बात श्री गुरु राम राय विवि और वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग की ओर से विवि में में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीजीपी अशोक कुमार ने कहा लोकभाषाओं के संवर्द्धन के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल काफी लाभप्रद हो सकता है। उन्होनें विवि के छात्रों व फैकल्टी से अपील की कि नशामुक्त समाज के लिए सभी सहयोग करें। यूकॉस्ट के पूर्व महानिदेशक डॉ राजेन्द्र डोभाल ने कहा कि विज्ञान से जुड़े विषयों को हिन्दी में भी पढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार व शिक्षा संस्थान सकारात्मक प्रयास कर रहे हैं। यह लोकभाषा के अस्तित्व से जुड़ी महत्वपूर्णं पहल है। यह व्यवस्था वृहद स्वरूप में लागू हो जाने पर छात्र-छात्राओं को व्यापक लाभ मिलेगा। विवि की चीफ एडिटर पब्लिकेशन इनोवेशन एण्ड इन्क्यूबेशन सेंटर एवं समन्वयक इंटरप्रिन्योरशिप सैल प्रोफेसर डॉ पूजा जैन ने जानकारी दी कि श्री गुरु राम राय विवि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत वैज्ञानिक प्रयोग को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। साथ ही कौशल विकास से जुड़े नए पाठ्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में विवि के कुलपति डा०यूएस रावत, उत्तराखण्ड साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर की निदेशक डा०अनीता रावत, संगोष्ठी प्रभारी इंजीनियर जय सिंह रावत,कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति प्रो। डॉ। होशियार सिंह धामी, विवि के निदेशक प्रो। द्वारिका प्रसाद मैठाणी, विवि की डीन आईटी डॉ पारुल गोयल, डॉ। प्रशांत सिंह, कुलसचिव डॉ। दीपक साहनी, डॉ। आरपी सिंह, डॉ। मनोज गहलोत आदि मौजूद रहे।

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