अब बांज के पत्तों में होगा रेशम कीटपालन

बागेश्वर। ग्रामीणों को मणिपुरी बांज और स्थानीय बांज के पेड़ों में टसर रेशम कीटपालन का कार्य कराया जा रहा है। यह कार्यक्रम ओक तसर रेशम कीट पालन के तहत चल रहा हे। रानीखेत की संस्थान किसानों को प्रशिक्षित कर रही है। चौड़ा, हरकोट, खल्झूनी, मिलकिला, तिमलाबगड़, फरसाली वल्ली, मल्लादेश, सिमगड़ी, लाथी, गुलेर आदि गांवों में मणिपुरी बांज का पौधारोण किया गया है। भविष्य में बांज के पत्तों में कीटपालन का कार्य किया जाएगा। वर्तमान में किसान स्थानीय बाज के पत्तों पर कीट पालन कर रहे हैं। उच्च हिमालय क्षेत्रों में यह मई-जून तक कीट पालन का कार्य होगा। किसानों ने बताया कि वह लगभग 40 दिन में बांज के पत्तों पर कोकून तैयार कर रहे हैं। परियोजना का मुख्य उद्देश्य सीमांत गांवों में पलायन रोकने और स्वरोजगार पैदा करना है। संजीवनी के संतोष जोशी ने का कि किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। वह कीट पालन से बेहतर आमदनी कर सकेंगे। इस दौरान किसान प्रेम सिंह, गंगा देवी, महेश सिंह, राजेंद्र सिंह, हीरा सिंह, चामू सिंह, बसंती देवी, प्रताप सिंह, चुनली देवी, जसपाल राणा, विनोद सिंह के अलावा प्रशिक्षक विनोद घुघत्याल, दीवान सिंह कपकोटी आदि मौजूद थे।

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