कागजों में गौशालाएं, हर माह खर्च हो रहे साढ़े 13 लाख

 

रीवा,

बिहार की तर्ज पर रीवा में भी चारा-भूसा घोटाला की गंध आ रही है। गौशाला संचालन के नाम पर निजी संस्थाएं और पंचायतें हर माह 13 लाख से अधिक का गबन बर रही हैं। कागजों में चलने वाली 29 गौशालाओं में 2252 गौवंशों को रखने का दावा किया गया है, जबकि हकीकत इससे परे है। लेकिन जिम्मेदार इस मामले पर आंख मूंदे हुए हैं। लिहाजा किसान परेशान हैं। उनकी फसलें आवारा मवेशी बर्बाद कर रहे हैं। दरअसल आरटीई के तहत मिली जानकारी में इसका खुलासा हुआ है। पशु चिकित्सा सेवाएं से रीवा जिले में संचालित गौशाला और उन पर होने वाले खर्च की जानकारी मांगी गई थी। जिस पर बताया गया कि जिले में 29 गौशालाएं संचालित हो रही हैं। इसमें 2252 गौवंशों को रखा गया है। हर माह इन गौवंशों पर चारा-भूसा के नाम पर 13 लाख रुपए से अधिक खर्च हो रहे हैं। अब यहां यह बात समझ से परे है कि जब जिले में गौशालाएं संचालित हो रही हैं, तो आवारा मवेशी सडक़ों और खेतों पर कैसे मंडरा रहे हैं। उनके भूख प्यास से तपड़पने की तस्वीरें कैसे सामने आती हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जिनके हाथों में गौशालाओं के संचालन का दायित्व सौंपा गया है, वह केवल खाना पूर्ति कर रहे हैं। यही वजह है कि सडक़ पर आवारा मवेशी दिखाई दे रहे हैं। किसान भी इनके आतंक से परेशान हैं। जबकि इन पर खर्च होने वाली राशि को गौशाला संचालन करने वाली निजी संस्थाएं और पंचायतें डकार रही हैं। सरकार ने मवेशियों से फसलों को बचाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर गौशला खोलने का एलान किया था। सभी पंचायतों में गौशालाएं खोली जानी है। जिले के कुछ पंचायतों में इसे खोला भी गया। बकायदा इसके लिए राशि भी रिलीज की गई, लेकिन यहां भी बाड़े व शेड बन कर रह गए। आधा-अधूरा निर्माण करा कर लाखों रुपये सरपंच व सचिव ने डकार लिया। अब यहां पर खाली बाड़े पड़े हैं, जबकि गौवंशों का पता नहीं है। बावजूद इसे यहां पर चारा-भूसा के नाम पर हजारों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आरटीआई के तहत जो जानकारी दी गई है, उसके आधार पर एक गौवंश को प्रत्येक दिन के मान से 20 रुपये का चारा-भूसा दिया जा रहा है। ऐसे में जिले की 29 गौशालाओं में 2252 गौवंश होने की जानकारी दी गई है। जिसके तहत हर माह इन पर 13 लाख 51 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन यह सब कागजों में हो रहा है। अधिकारी निरीक्षण पर निकलें तो इसकी सच्चाई बाहर आए।

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