दोनों राज्यों में भाजपा सरकारें फिर भी मंदानिकी बेजार  

 

सतना,

मंदाकिनी नदी दो राज्यों से होकर गुजरती है इसलिए इसकी स्वच्छता का जिम्मा भी दोनों राज्यों के कंधों पर है, लेकिन अफसोस कि आज तक इन दोनों प्रदेशों के नीति नियंता मंदाकिनी को नजरअंदाज करते आ रहे हैं। मध्यप्रदेश में विगत 15 वर्षों से भाजपा का शसन है जबकि उप्र में भी भाजपा की ही सरकार है जो धार्मिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए जानी जाती हे लेकिन मंदाकिनी की दुर्दशा देखकर लगता है कि दोनों ही राज्यों की सरकार के एजेंडे में मंदाकिनी की निर्मलता नहीं है। कई बार स्थानीय साधु संतों ने नदी की दुर्दशा को लेकर धरना प्रदर्शन आंदोलन किया और सरकार से नाराजगी भी जाहिर की। एक मर्तबा तो मप्र के सीएम खुद चित्रकूट आकर प्रर्दान कर संतों से मिले और नदी को प्रदूषणमुक्त करने का आश्वासन दिया। उधर उत्तर प्रदेश में सन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मंदानिकी को प्रदूषणमुक्त करने का संकल्प भगवा ब्रिगेड द्वारा विधानसभा चुनाव में मंदाकिनी को प्रदूषणमुक्त करने का संकल्प भगवा ब्रिगेड द्वारा बार बार दोहराया गया और सरकार बन भी गई। सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने दो बार जनपद का दौरा किया और मंदाकिनी के अस्तित्व को बचाने की हुंकार भी भरी लेकिन सिस्टम के पहलुओं ने इसके बाद आंखें बंद कर ली जिसके चलते चित्रकूट की लाइफ लाइन मानी जाने वाली मंदाकिनी की पर्यावरणीय सेहत दिनों दिन बिगड़ रही है। प्रदूषण व गंदगी से उसके अंचल कोक इस कदर मैला किया है कि लोग आचमन से भी कतराने लगे हैं।

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