बुंदेलखंड से बज उठा है राजनीतिक बिगुल
झांसी।
24 के लोकसभा समर के पहले लगभग सभी राजनीतिक दलों की निगाह उप्र जीतने पर गढ़ी हुई हैं और तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों समाजवादी, कांग्रेस और भाजपा ने इसके लिए स्वर्णिम शुरुआत के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र को चुना हैं जहां से 19 विधानसभा सीटों के लिए मारामारी है और ये सभी 19 सीटें फिलहाल भाजपा के कब्जे में हैं। यूं तो प्रदेश में 403 विधानसभा क्षेत्र हैं जिसमें से 52 को संघ और भाजपा ने कानपुर- बुंदेलखंड जोन में बांटा है।
खास बात यह है कि प्रदेश में फिर से सत्ता हासिल करने की कोशिश में जुटी भाजपा पूर्वांचल के अलावा बुंदेलखण्ड पर भी अपनी पैनी निगाह बनाए हुए है। प्रदेश के इस पिछड़े क्षेत्र के विकास को लेकर ही मोदी और योगी सरकार लगातार अपना फोकस बनाए हुए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महोबा में जनसभा और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन के बहाने भाजपा की शतरंज बिछा चुके हैं। डबल इंजन की सरकार ने अपनी इसी जुगलबंदी के तहत बुंदेलखण्ड एक्सप्रेस वे, हर घर नल योजना, डिफेंस कोरीडोर और ललितपुर में मेडिकल कॉलेज का बड़ा तोहफा दिया है और 31 दिसंबर को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे को जनता को समर्पित करने हेतु पुन: बुंदेलखंड आने का मन बना रहे हैं। पिछले साढ़े चार सालों में भाजपा की कोशिश यही रही है कि बुंदेलखंड के लोगों में विश्वास जगाकर इस क्षेत्र में वोटों को अपने पाले में किया जाए।
याद करिए 17 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने बुंदेलखंड में रैली कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाकर बुंदेलखंड में अपना परचम लहराने का काम किया था और इस बार भी महोबा की जनसभा के बाद बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे लोकार्पण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक और बड़ी सभा कराए जाने की योजना है। कभी कांग्रेस के गढ़ रहे बुंदेलखण्ड क्षेत्र में बोफोर्स कांड, मंडल आयोग और राम मंदिर आंदोलन के बाद पार्टी कमजोर होती गयी। इस पूरे क्षेत्र में बसपा और समाजवादी पार्टी का प्रभाव बढ़ता गया। पर 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद से भाजपा की ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है।
भाजपा की इसी सक्रियता को देखते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बुंदेलखंड के चित्रकूट और महोबा में कार्यक्रम कर चुकीं हैं और झांसी में किला घूमने के बहाने राजनीतिक संदेश दे चुकीं हैं। इस दौरान प्रियंका गांधी ने महिलाओं से बातचीत करने के साथ ही मंदिरों में माथा टेक कर बुंदेलखंड के वोटरों को प्रभावित करने की की कोशिश की।
दिसंबर के पहले ही दिन समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी बुंदेलखंड में अपना विजयरथ ले उतर चुके हैं और बांदा, चित्रकूट के बाद 3 दिसंबर झांसी में अपने बुंदेलखंड दौरे का समापन कर क्षेत्र का दौरा कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कभी कांग्रेस का गढ़ रहा बुंदेलखंड अब भाजपा का अभेद्य गढ़ बन चुका है। भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में कानपुर-बुंदेलखंड की 52 में से 47 सीटों पर कमल खिलाया था। पार्टी क्लीन स्वीप से महज पांच सीटें पीछे रह गई थी। कानपुर-बुंदेलखंड की पांच सीटों पर हार का सामना करने के बाद भाजपा ने एक बार फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र की 10 में से 10 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी।
अगर केवल बुंदेलखंड क्षेत्र की ही बात की जाए तो सात जिलों में फैले इस क्षेत्र में चार लोकसभा और 19 विधानसभा की सीटें हैं। इसमें जालौन जिले में तीन, झाँसी में चार, ललितपुर में दो, हमीरपुर में दो, महोबा में दो, बांदा में चार और चित्रकूट में दो विधानसभा की सीटें हैं। 2017 में भाजपा ने बुंदेलखंड में अपनी राजनीतिक जड़ें इस कदर मजबूत कर ली थी कि 2019 में सपा और बसपा गठबंधन की चूलें हिल गयी। भाजपा की अब यही रणनीति है कि मिशन 2022 मेें भी यही स्थिति बरकरार रहे। संगठन इस बार कानपुर-बुंदेलखंड की सभी विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए विशेष कार्ययोजना के तहत काम किया जा रहा है।
