इंदौर नगर निगम का क्लर्क काली कमाई का राजकुमार
इंदौर,
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) इकाई इंदौर के अनुपातहीन सम्पत्ति के छापे में 25 साल की नौकरी मं कुल 16 लाख 29 हजार रुपए का वेतन प्राप्त करने वाला इंदौर नगर निगम का कर्मचारी राजकुमार सालवी करोड़ों रुपए की संपत्ति का मालिक निकला। छापे में उसके तीन मकान सहित अन्य संपत्ति का पता चला है। यद्यपि ईओडब्ल्यू ने अधिकृत रूप से उसकी संपत्ति का आंकलन डेढ़ करोड़ रुपए किया है। अन्य संपत्ति का पता बैंक खातों आदि की जानकारी के बाद पता चल सकेगा। ईओडब्ल्यू एसपी धनंजय शाह के नेतृत्व में छापे की कार्रवाई गत दिवस सुबह तीन अलग अलग दलों ने की। एसपी शाह के मुताबिक निगम क्लर्क सालवी अम्बिकापुरी मेन निवासी हैं। छापे की कार्रवाई उसके अम्बिकापुरी स्थित घर, सीताश्री रेसीडेंसी एरोड्रम रोड स्थित फ्लैट एवं सालवी की माता चंदा बाई के वैद्य ख्यालीराम मार्ग, बियाबानी स्थित मकान पर अलग-अलग टीमों ने छापे मारे। छापे में क्लर्क राजकुमार सालवी के आधिपत्य में दो प्लाट, एक मकान, एक फ्लैट, एक कार और लाखों रुपए के सोने चांदी के आभूषण पाए गए। इसके साथ ही बीमा योजनाओं में लाखों रुपए का विनियोजन होना पाया गया है जिनकी छानबीन जारी है। बैंक खातों का भी पता लगाया जा रहा है। एसपी के मुताबिक छापे में मिली कुल संपत्ति की कीमत डेढ़ करोड़ रुपए पाई गई है। ईओडब्ल्यू एसपी शाह के मुताबिक राजकुमार सालवी वर्ष 1997 से नगर निगम के लेखा विभाग में मस्टर कर्मचारी के रूप में लंबे समय से कार्य कर रहा है। वर्ष 2016 में उसे स्थाई कर्मचारी के रूप में पदस्थ किया गया। लगभग 25 साल के सेवा काल में सालवी का वेतन 1629632 रुपए वेतन भत्ते के रूप में प्राप्त होना ज्ञात हुआ है। ईओडब्ल्यू एसपी शाह का कहना है कि लेख विभाग में ठेकेदारों के बिल भुगतान का काम किया जाता है। जांच की जा रही है कि इसमें क्या गड़बड़ी होती है और किसकी क्या भूमिका है। राजकुमार के ठेकेदारों के साथ ही कई व्यवसायिक लोगों से गहरी पकड़ है। ईओडब्ल्यू एसपी शाह के मुताबिक आरोपी अम्बिकापुरी में तीन मंजिला मकान में रहता है। छानबीन में पता चला है कि निगम कर्मी ने परिवार के पास करोड़ों की संपत्ति है। ईओडब्ल्यू टीम गत दिवस सालवी के अम्बिकापुरी स्थित मकान पर पहुंची तब तक वह घबरा कर बाथरूम की तरफ भाग गया। फिर टीम ने उसे समझाया कि सिर्फ तलाशी ली जाएगी। छापे के पूर्व ईओडब्ल्यू ने संपत्ति संबंधी पूरी जानकारी जुटा ली थी। ईओडब्ल्यू के मुताबिक राजकुमार ने कुछ साल पहले पत्नी के नाम पर एक फर्म बनाई थी। इसमें करोड़ों का लेनदेन हुआ था। कुछ समय बाद यह फर्म बंद कर दी गई। तब राजकुमार की शिकायत की गई थी। यद्यपि कार्रवाई नहीं हुई।
