पूरी दुनिया भारता माता की जय बोले: हमारे सामने विश्व की चुनौतियां हैं – गृह राज्यमंत्री
कानपुर।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ने कहा है कि पूरी दुनिया भारता माता की जय बोले, हर भारतवासी को ऐसा काम करना है। हमारे सामने विश्व की चुनौतियां हैं, सरकार तीन-चार वर्ष बाद की चुनौतियों पर काम कर रही है। शनिवार को मर्चेंट चैंबर हाल में भगवान श्री परशुराम न्यास द्वारा आयोजित कार्यक्रम को वह संबोधित कर रहे थे।
वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में प्रबुद्ध वर्ग की भूमिका विषय पर आयोजित सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने कहा कि भारत अपने गौरव को हासिल करेगा,इसके लिए चाहे शहरों के नाम बदलने पड़ें या सड़कों के। हम सभी देशों से मेलजोल करके रखते हैं,सभी देशों को लगता है कि भारत से कोई नुकसान की आशंका नहीं है, इसलिए वे हमारे साथ में जुड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि आज प्रबुद्ध वर्ग के सम्मेलन सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं लेकिन ज्यादातर कुछ जातियों के साथ ही ये सम्मेलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद हम जैसा देश चाहते थे,दुर्भाग्य से ऐसी सरकार बनी जिसने ज्ञान,परंपरा,संस्कार की अपेक्षा विदेशी तर्ज पर विकास किया। इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ऐसे दल की जरूरत महसूस की जो इन कमी को पूरा कर सके। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं,अंतिम सीढ़ी पर बैठे व्यक्ति को लाभ देना है। हम आज भी आध्यात्मिक है और तपस्या करने वालों को सम्मान देते हैं। हमारा चार हजार वर्ष से ज्यादा पुराना इतिहास है। उसकी शिक्षा का प्रभाव आज भी दिखता है। जब अफगानिस्तान से हम अपने देश के नागरिकों को निकालते हैं,तो दूसरे देश के लोगों को भी निकालते हैं। यह उसी शिक्षा का असर है। इसलिए हमारे अंदर संस्कार हैं।
उन्होंने कहा कि आज प्रबुद्ध वर्ग के सम्मेलन सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं लेकिन ज्यादातर कुछ जातियों के साथ ही ये सम्मेलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद हम जैसा देश चाहते थे,दुर्भाग्य से ऐसी सरकार बनी जिसने ज्ञान,परंपरा,संस्कार की अपेक्षा विदेशी तर्ज पर विकास किया। इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ऐसे दल की जरूरत महसूस की जो इन कमी को पूरा कर सके। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं,अंतिम सीढ़ी पर बैठे व्यक्ति को लाभ देना है। हम आज भी आध्यात्मिक है और तपस्या करने वालों को सम्मान देते हैं। हमारा चार हजार वर्ष से ज्यादा पुराना इतिहास है। उसकी शिक्षा का प्रभाव आज भी दिखता है। जब अफगानिस्तान से हम अपने देश के नागरिकों को निकालते हैं,तो दूसरे देश के लोगों को भी निकालते हैं। यह उसी शिक्षा का असर है। इसलिए हमारे अंदर संस्कार हैं।
