मथुरा में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या हुई शून्य
मथुरा।
मथुरा में इस समय कोरोना का कोई सक्रिय मामला नहीं है। मथुरा पूरी तरह से कोरोना मुक्त हो गया है। कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद यह पहला अवसर है जब जनपद में कोरोना का कोई सक्रिय मरीज नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर मथुरा को गहरे घाव देकर गई है। पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में ज्यादा परिवारों ने अपने प्रियजन का खोया है। फिलहाल लोगों ने राहत की सांस ली है।
जिले में 6 अप्रैल 2020 को पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिला था। 17 महीनों में नौ लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई। इनमें कुल 22882 संक्रमित मिले। 400 मरीजों की मौत हो गई। 28 अगस्त 2021 के बाद कोई नया पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है। जिले में कोई सक्रिय मरीज भी नहीं है।
कोरोना का कहर थमने से लोगों को राहत मिले है लेकिन मुश्किल कम नहीं हुई हैं। कोरोना का कहर थमने के बाद लोग भी ठीक से सम्हले भी नहीं थे कि गांवों में डेंगू और मलेरिया ने दस्तक दे दी। जिले में बुखार से अब तक 22 की मौत हो चुकी हैं, जिनमें 12 बच्चे शामिल हैं। फरह के कोह गांव में सबसे अधिक मरीज मिले हैं। कोविड प्रभारी डॉक्टर भूदेव सिंह ने बताया कि मथुरा जनपद में 28 अगस्त से ना तो कोई नया केस मिला है। और ना ही कोई संक्रमित आइसोलेशन में है। बीते 10 दिनों में कोई भी नया कोरोना पॉजिटिव नहीं मिलने पर मथुरा को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया है। मथुरा कोरोना मुक्त हो गया है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। लोग सावधानी बरतें। नियमों का पालन करें। जिससे महामारी से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए पीकू वार्ड बनाए गए हैं।
युवा रालोद ने किया सीएमओ कार्यलय पर प्रदर्शन
युवा रालोद कार्यकर्ताओं ने सोमवार को सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान रालोद कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की लापवाही से कोह सहित दूसरे गांवों में बुखार से लोगों खास कर बच्चों की जान गई हैं। इस दौरान इस बीमारी के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की गई।
डेंगू से मरने वालों को पांच आर्थिक मदद की मांग
किसान गरीब एकता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ताराचंद गोस्वामी ने मांग की है कोह गांव सहित जनपद में रहस्यमयी बीमारी से जिन लोगों की मौत हुई है उनके परिजनों को राहत के तौर पर पांच लाख रूपये की आर्थिक मदद दिए जाने की सरकार से मांग की है।
