बच्चों को कोरोना से बचाने हेतु दिया आशाओं को प्रशिक्षण
रुडक़ी
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए कवायद तेज कर दी है। शनिवार को क्षेत्र की आशा कार्यकत्रियों के लिए सीएचसी परिसर में शिविर लगाकर कोरोना संक्रमित बच्चे की पहचान और इसके इलाज की जानकारी दी गई। दो चरणों के शिविर में दो सौ आशाओं ने प्रशिक्षण लिया। अगस्त सितंबर में कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों के संक्रमित होने की संभावना का देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अभी से तैयारी में जुटा हुआ है। शनिवार को इसी बाबत लक्सर सीएचसी परिसर में आशाओं के लिए शिविर का आयोजन किया गया। अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा ने शिविर की शुरूआत की। उन्होने कहा कि कोरोना की पिछली दो लहरों में हमें बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। आगे से ऐसा न हो, इसके लिए हमें अभी से मुकम्मल तैयारी करके रखनी होगी। खासकर अपने परिवार के मासूम बच्चों को इसकी चपेट में आने से रोकना हारी बड़ी जिम्मेदारी है। इसके बाद मास्टर ट्रेनर आंचल सैनी ने रबर के बच्चे के मॉडल से आशाओं का कोरोना की तीसरी लहर के बारे में जागरूक किया। बताया कि बच्चे की सांस व्यवस्थित रहे, हर मां को इसका ध्यान रखना है। सांस के साथ फुलने वाली शिशु की छाती गिनकर इसका पता लगाया जाता है। यदि सांस एक मिनट में चालीस से कम या साठ से अधिक है तो डॉक्टर को दिखाना जरुरी है। ब्लॉक कोर्डिनेटर सोहनलाल तंवर ने कहा कि आशाओं को अपने गांव के प्रत्येक घर में जाना है, और महिलाओं को यह जानकारी देकर उन्हें जागरूक करना है। डॉ. राजीव कमार, हरिशंकर, आशीष शर्मा, देवेंद्र सिंह रावत, डॉली गुप्ता, पंकज यादव, सीमा गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए। शिविर में रीटा, नीलम, अनीता, प्रमिला, निशी, सुमन, सविता, ममता, सगीता, राखी, पूनम, प्रहति, प्रियंका आदि आशाओं ने प्रशिक्षण लिया।
