ब्लड बैंक में गहराया खून का संकट, सभी निगेटिव ग्रुप का खून नदारद

अमरोहा

कोरोना महामारी के दौर में जिले के इकलौते ब्लड बैंक में खून का संकट गहरा गया है। ब्लड बैंक में सभी निगेटिव ब्लड ग्रुप का टोटा हो गया है। संक्रमण काल से पहले 50 से 60 के मुकाबले ब्लड बैंक के स्टॉक में महज 11 यूनिट ब्लड बचा हुआ है।
कोरोना महामारी के दौर में जिले के इकलौते ब्लड बैंक में खून का संकट गहरा गया है। बड़ी संख्या में कोरोना के गंभीर मरीजों, घायलों, गर्भवती महिलाओं और थैलीसीमिया के बच्चों को भी ब्लड मिलना मुश्किल हो गया है। इस बीच जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर व जनरल वार्ड में भर्ती मरीजों को भी खून चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है। लेकिन मांग के सापेक्ष ब्लड उपलब्ध न होने से मरीजों के परिजनों को मुरादाबाद, हापुड़, मेरठ और गाजियाबाद तक दौड़ लगानी पड़ रही है। कोरोना के गंभीर मरीजों, घायलों, गर्भवती महिलाओं और थैलीसीमिया के बच्चों को खून की जरूरत पूरी करने के लिए परिजन अपने परिचितों, रिश्तेदारों से लेकर सोशल मीडिया तक गुहार लगा रहे हैं। गौरतलब है कि संक्रमण के दौर में ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर नहीं लग रहे हैं। संक्रमण के खौफ के बीच लोग रक्तदान करने से भी बच रहे हैं। ऐसे में जिले के एकमात्र ब्लड बैंक में जाहिर तौर पर खून का संकट गहरा गया है। ब्लड बैंक में सभी निगेटिव ब्लड ग्रुप का बीते तीन माह से टोटा है। संक्रमण दौर से पहले 50 से 60 के मुकाबले ब्लड बैंक के स्टॉक में महज 11 यूनिट ब्लड बचा हुआ है। कई बार ब्लड देने के बाद भी मजबूरी में मरीजों के परिजन रक्तदान के लिए खुद ही आगे आ रहे हैं। संक्रमण काल में यही हालत रही तो आने वाले दिनों में ब्लड के लिए मारामारी का मचना तय है। संक्रमण के दौर में पैदा हुए हालातों को भांपते हुए जिम्मेदार अफसर भी इस बावत कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
कोरोना संक्रमण काल में ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर नहीं लग रहे हैं। वायरस के डर से लोग रक्तदान भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में ब्लड की कमी होना लाजिमी है। लोगों को चाहिए कि नजदीकी संबंधियों की ब्लड की जरूरतों को पूरा करें। घबराएं नहीं, जल्द ही हालात सामान्य होने की उम्मीद है।
डा.सौभाग्य प्रकाश, सीएमओ

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