विकासनगर में वन रैंक वन पेंशन को लेकर पूर्व सैनिकों ने रैली निकाली
विकासनगर। वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में सोमवार को पूर्व सैनिकों ने विकासनगर पोस्ट ऑफिस से तहसील तक कार और बाइक रैली निकाली। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने तहसील कार्यालय पर अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। पूर्व सैनिकों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। लंबे समय से वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं होने पर पूर्व सैनिक पोस्ट ऑफिस के पास शहीद स्मारक पर एकत्रित हुए। शहीद स्थल पर पूर्व सैनिकों ने पहले शहीदों को नमन किया। जिसके पश्चात पूर्व सैनिकों ने पोस्ट ऑफिस से लेकर विकासनगर बाजार होते हुए तहसील परिसर तक कार-बाइक रैली निकाली। रैली मुख्य बाजार से होते हुए तहसील प्रागंण पहुंची। जहां पूर्व सैनिकों ने भारत माता की जय, साडा हक इते रख जैसे नारे लगाकर अपनी मांगों को मुखरता से उठाया। तहसील प्रागंण पहुंचने पर उन्होंने नारेबाजी करते हुए अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारी पूर्व सैनिकों ने प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री को उपजिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूर्व सैनिकों ने बताया कि सिपाही से लेकर ऑनरेरी कमीशन ऑफिसर रैंक तक वन रैंक वन पेंशन की मांग पिछले दस वर्षों से कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांगों को सरकार लगातार नजरंदाज कर रही है। बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा ओआरपी-वन व ओआरपी-टू लागू की गई है उसका फायदा सेना के उच्चाधिकारी ले रहे हैं। बताया कि इसकी अलग-अलग शर्तों के कारण अधिकारी 57 से 62 साल की उम्र तक सेवा करते हैं। जबकि जवान को 35 से 40 उम्र के बाद जबरन रिटायर कर दिया जाता है। बताया कि अधिकारी वर्ग का टाइम स्कूल पदोन्नति है और सलेक्शन ग्रेड मे भी एक निश्चित सेवा काल के बाद ये पदोन्नति के पैनेल में आ जाते हैं। जबकि जवान का पदोन्नति वैकेंसी पर अधारित है। इसलिए योग्यता रखने के बावजूद किसी-किसी रजीमेंट मे 10 साल में ही हवलदार बन जाते हैं तो कहीं कहीं 18 साल लग जाते हैं। जबकि कोई वैकेंसी नहीं होने के कारण बिना पदोन्नति के ही जबरान रिटायर कर दिया जाता है।
