श्रद्धा, विश्वास और समर्पण ही भगवान से मिलन का माध्यम: डॉ चिन्मय पण्ड्या
हरिद्वार । देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि जब-जब धर्म, अध्यात्म व संस्कृति कराहती है, अकुलाती है, तब-तब प्राणी मात्र के कल्याण व मंगल करने के लिए विविध रूपों में भगवान धरती पर आते हैं। उन्होंने कहा कि साधकों की श्रद्धा, विश्वास और समर्पण ही भगवान से मिलन का माध्यम बनता है। यह बात उन्होंने गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में बुधवार को पांच दिवसीय राष्ट्रीय सक्रिय कार्यकर्ता शिविर का शुभारंभ के दौरान कही।
कार्यक्रम की शुरुआत साधक का सविता को अर्पण, शिष्यों का गुरु को समर्पण भक्ति संगीत से हुआ। इस मौके पर पण्ड्या ने कहा कि साधक, शिष्यों की साधना जितनी बलवती होगी, उसी रूप में भगवान की कृपा व आशीष मिलता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह श्रद्धा, निष्ठा एवं समर्पण से ही भक्त प्रह्लाद के जीवन की रक्षा हुई। श्रीकृष्ण ने मीरा को जहर से बचाया। उसी तरह आज भी भगवान अपने शिष्यों को बचाते हैं। शैफाली पण्ड्या ने नारी जागरण की दिशाधारा एवं महिला सशक्तिकरण के विविध पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. गोपाल शर्मा ने किया। इस मौके पर शांतिकुंज व्यवस्थापक महेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ कार्यकर्ता शिवप्रसाद मिश्र, राष्ट्रीय जोनल समन्वयक डॉ. ओपी शर्मा, प्रो. विश्वप्रकाश त्रिपाठी, प्रो. प्रमोद भटनागर, कार्यक्रम विभाग प्रभारी श्याम बिहारी दुबे, गुजरात जोन समन्वयक उदय किशोर मिश्र मौजूद रहे।
