उत्तराखंड में भी इंटीग्रेटेड काउंसिल स्थापित हो
ऋषिकेश। स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाए जाने एवं विश्वस्तरीय शोध हेतु भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान नेशनल इंस्टीट्ययूट ऑफ वायरोलॉजी एवं एकीकृत परिषद ( इंटीग्रेटेड काउंसिल) को उत्तराखंड में भी स्थापित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। पीएम मोदी ने भी अपनी मन की बात में इसका जिक्र किया है। उत्तराखंड की राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी ने राज्यसभा में भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया। ऋषिकेश एम्स के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. जितेंद्र गैरोला ने पत्रकारों को बताया कि इस संबंध में उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी सहित राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों से पत्राचार कर इंटीग्रेटेड कांउसिल ओर संस्थान को स्थापित करने का अनुरोध किया है। आयुष्मान भारत इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत केंद्र सरकार की ओर से जोनल स्तर पर 4 अलग-अलग स्थानों पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी स्थापित किए जाने हैं। इस योजना का उद्देश्य भविष्य में समय-समय पर सामुदायिक स्तर पर संक्रमण के चलते तेजी से फैलने वाली कोविड-19 जैसी महामारी से निपटने में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करना है। संस्थान की स्थापना हो जाने से नई एंटी वायरल दवाइयों पर शोध, डायग्नोस्टिक किट एवं वैक्सीन भी व्यापक स्तर पर बनाई जा सकेगी। इस सम्बन्ध में उन्होंने मुख्यमंत्री के अलावा विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, पूर्व मुख़्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल एवं रायपुर विधायक उमेश काऊ को ज्ञापन सौंप उनके समक्ष भी इस मांग को रखा।
