लोक निर्माण विभाग नई तकनीकी से जिले में करेंगे काम
इंदौर,
प्रदेश की सडक़ों को गड्ढामुक्त करने की जिम्मेदारी अब निजी कंपनियां उठाएंगी। जेट इंजेक्शन तकनीक से ये सडक़ें तुरंत ठीक की जा सकेंगी। लोक निर्माण विभाग सबसे पहले यह प्रयोग भोपाल औार समीप के एक जिले में करने जा रहा है। गड्ढों को भरने के लिए समय सीमा भी तय होगी और देरी पर कंपनी पर पेनाल्टी लगाने का प्रावधान भी किया जाएगा। भोपाल के बाद इंदौर में भी यह प्रयोग शुरु होगा। प्रदेश में बनने वाली सडक़ों के निर्माण के बाद यूं तो उसके निर्माता ठेकेदार की ही जिम्मेदारी उसके तय समय तक संधारण की होती है। गड्ढे समय पर नहीं भरे जाते और देरी के कारण ये गड्ढे सडक़ों को और अधिक बदहाल बना देते हैं। लोक निर्माण विभाग पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राजधानी भोपाल और रायसेन, सीहोर या विदिशा में से किसी एक जिले में यह काम शुरु करेगा। इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी कर निजी कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। ठेका फाइनल होने पर बारिश के बाद कंपनी इस काम को शुरु कर देगी। राज्य सरकार टेंडर के जरिए देशभर की सडक़ संधारक कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित करेगी। इसमें जो कंपनी यह काम लेगी उसे सडक़ के किलोमीटर के हिसाब से गड्ढे भरने, पेंच वर्क करने की जिम्मेदारी सोंपी जाएगी। प्रारंभ में एक साल तक यह काम निजी कंपनी को सौंपा जाएगा। निजी कंपनी इसके लिए जेट इंजेक्शन तकनीक पर आधारित मशीनों का प्रयोग करेगी। इन मशीनों के जरिए गरम डामर और गिट्टी को प्रेशर के साथ गड्ढे में डाला जाता है। इससे गड्ढे तेजी से भरना आसान होता है। कंपनी को तीन सौ से पाँच सौ किलोमीटर पर एक मशीन रखने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इसमें गड्ढे के मेजरमेंट की बजाय सडक़ के किलोमीटर के आधार पर हर तरह के गड्ढे को भरने का कांटे्रक्ट किया जाएगा। समय सीमा में गड्ढे नहीं भरने पर प्रतिदिन केक हिसाब से पैनाल्टी लगाने का प्रावधान भी किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री मनोज सक्सेना ने बताया कि जेट इंजेक्शन तकनीक से सडक़ों के गड्ढे भरे जाएंगे और सडक़ों का निर्माण भी होगा। अभी इसका प्रयोग भोपाल में शुरु होने जा रहे है। इसकी सफलता के बाद यहां पर भी यह तकनीक उपयोग में लाई जा सकती है।
