सात महीने में सुलझाए साइबर क्राइम के 47 मामले

मथुरा ।

जनपद में पुलिस ने सात वर्ष 2021 के गुजरे सात महीने में साइबर क्राइम के 47 मामलों का खुलासा किया है। जबकि पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर धोखाधडी के इन मामलों में पुलिस ने 36.28 लाख रुपये की रिकवरी भी कराई है। साइबर क्राम से पिनटने में जागरूकता को सबसे बडा हथियार माना जा रहा है। पुलिस विभाग की ओर से आम लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। बाकायदा साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चला कर लोगों को इस बात के प्रति आगाह किया गया कि वह किस तरह साइबर हमलों का सामना कर सकते हैं। अगर साइबर ठगी के शिकार हो भी जाते हैं तो जल्द से जल्द क्या करना चाहिए?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध में टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। साइबर क्राइम की घटना होने के बाद पीडित जितना जल्दी सूचना दे देता है सफलता की उम्मीद भी उतनी ज्यादा होती है।
धोखाधड़ी की जानकारी 10 से 25 मिनट में ही साइबर सेल और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर मिल जाती है तो रकम को काफी हद तक वापस कराया जा सकता है। ई वॉलेट और खाते में लेन-देन को रोककर रकम को को बचाया जा सकता है। खाते में रकम भेजने का झांसा देकर जानकारी लेते हैं। इसके बाद खाते से रकम ट्रांसफर कर लेते हैं। एटीएम कार्ड बदलकर और क्लोन कार्ड बनाकर भी खाते साफ कर रहे हैं। ठगी का शिकार ग्रामीण ही नहीं, जानकार लोग भी हो रहे हैं। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है। साइबर अपराधी रोजाना नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। उनका मकसद सिर्फ खाते की जानकारी लेकर रकम ट्रांसफर करना होता है। कॉल करके बैंक, बीमा, फाइनेंस और पीएफ कर्मचारी बताते हैं। कई बार लोग साइबर सेल तक आने में देरी कर देते हैं। इसका फायदा साइबर अपराधियों को मिलता है। साइबर अपराधी एटीएम कार्ड की जानकारी लेकर ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। इसके लिए ई वॉलेट का प्रयोग किया जाता है। इससे साइबर ठग दो दिन के ट्रांजेक्शन के बराबर तकरीबन 40 से 50 हजार रुपये बैंक खाते से निकाल लेंगे। शनिवार और रविवार को रकम ज्यादा निकाली जाती है। रविवार को छुट्टी होती है। इससे कई बार लोग खाता ब्लॉक नहीं कर पाते हैं।

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