रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी की बिक्री में आ सकता है 30 फीसदी का उछाल
नईदिल्ली।
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कंपनी एनारॉक के अनुसार 2021 में सात प्रमुख शहरों में रेंजीडेंशियल घरों की बिक्री में 30 फीसदी का उछाल दर्ज किया जा सकता है. यह बिक्री बढ़कर करीब 1.8 लाख इकाई हो सकती है, हालांकि बिक्री बढऩे के बाद भी इसे अभी भी कोविड-पूर्व स्तर तक पहुंचने में वक्त लगेगा.
एनरॉक के रिसर्च के मुताबिक 2021 में सात शहरों में आवासीय बिक्री वार्षिक आधार पर 30 प्रतिशत बढ़कर 1,79,527 इकाई होने की उम्मीद है, जो पिछले साल 1,38,344 इकाई थी.
इससे पहले साल 2019 में सात शहरों-दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर), पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में आवासीय बिक्री 2,61,358 इकाई थी.कंपनी ने यह भी अनुमान लगाया कि बिक्री 2022 में 2,64,625 इकाई और 2023 में 3,17,550 इकाई तक बढ़ सकती है.
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ”आवासीय क्षेत्र 2017 से 2019 के बीच वार्षिक आधार पर अच्छी बढ़त दिखा रहा था, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते यह हालात पटल गए. अगर ऐसा नहीं होता तो 2020 आवासीय क्षेत्र के लिए एक बेहतरीन साल होता.ÓÓ एनारॉक ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले 2021 में आवासीय पेशकश में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जबकि इस दौरान बिक्री 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है.
वहीं दूसरी और डेटा एनालिटिक कंपनी प्रॉपइच्टिी की एक रिपोर्ट में बताया कि कोविड-19 की दूसरी लहर की वजह से अप्रैल-जून 2021 तिमाही में देश के सात बड़े शहरों में घरों की बिक्री में 58 प्रतिशत की कमी आई. आंकड़ों के मुताबिक रिहायशी संपत्तियों की बिक्री अप्रैल-जून, 2021 तिमाही में 45,208 इकाई थी जबकि उससे पहले की तिमाही (जनवरी-मार्च 2021) में यह 1,08,420 इकाई थी.
प्रॉपइच्टिी ने एक बयान में कहा, अप्रैल और मई में भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर का बुरा असर पड़ा जिसके साथ बिक्री में 58 प्रतिशत की भारी गिरावट आई. बयान में कहा गया कि भारत के प्रमुख शहरों में कड़े लॉकडाउन ने घरों की बिक्री को प्रभावित किया क्योंकि आवासीय पंजीकरण निलंबित कर दिए गए थे और गृह ऋण का वितरण धीमा था. बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई महानगर क्षेत्र, दिल्ली-एनसीआर और पुणे में 2021 की दूसरी तिमाही में 2021 की पहली तिमाही की तुलना में घरों की बिक्री में क्रमश: 55 प्रतिशत, 59 प्रतिशत, 49 प्रतिशत, 57 प्रतिशत, 63 प्रतिशत, 43 प्रतिशत और 62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
