दो पहिया वाहन पर महिला हो या पुरुष दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य
इंदौर।
हाई कोर्ट इंदौर ने दो पहिया वाहन पर महिला हो या पुरुष दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य के संबंध में वर्ष 2011 से विचाराधीन दो जनहित याचिकाओं का गत दिवस निराकरण कर िदया। शासन ने कोर्ट को बताया कि मप्र मोटरयान अधिनियम की उस धारा को ही विलोपित कर दिया गया है जिसके तहत हेलमेट पहनने से छूट दी जा रही थी। इस पर कोर्ट ने दोनों याचिकाएं निराकृत कर दीं। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में यातायात पुलिस ने बगैर हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों के खिलाफ मुहिम में दोपहिया वाहन महिलाओं के भी बड़ी संख्या में चालान बनाए थे। इस पर इस बात का कड़ा विरोध हुआ था कि टै्रफिक पुलिस महिलाओं को परेशान कर चालानी कार्रवाई के नाम पर अवैध वसूली कर रही है। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोट्र इंदौर में दो जनहित याचिकाएं दायर हुई। इनमें कहा गया था कि शहर में हेलमेट की कमी है। मौके का फायदा उठाते हुए मनमाने दाम पर हेलमेट बेचे जा रहे हैं। मोटरयान अधिनियम के तहत भी छूट देने का प्राविधान है। कोर्ट ने दो जून 2011 को अंतरिम राहत देते हुए महिलाओं के लिए हेलमेट की अनिवार्यता से छूट दे दी थी। तब से दोनों याचिकाएं लंबित थीं। गत दिवस दोनों याचिकाओं की सुनवाई में शासन की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल पुष्यमित्र भार्गव ने कोर्ट को अवगत कराया था कि मप्र मोटरयान अधिनियम की जिस धारा के तहत महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट देने का प्राविधान था लेकिन राज्य सरकार ने तीन मार्च 2021 की अधिसूचना जारी कर इस धारा को ही विलोपित कर दिया गया है। अब ये अस्तित्व में नहीं है। ऐसी स्थिति में याचिकाओं का कोई मतलब नहीं। इस पर कोर्ट ने याचिकाएं निराकृत कर दीं।
