निजी नर्सिंग होम के नहीं खोले दरवाजे, गेट पर जन्मा बच्चा
हरिद्वार
ज्वालापुर स्थित निजी अस्पताल के बाहर एक गर्भवती महिला ने नवजात शिशु को जन्म दिया। आरोप है कि निजी अस्पताल संचालक ने महिला के लिए अस्पताल का गेट तक नहीं खोला। आसपास के लोगों ने 108 वाहन को बुलाकर महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जिला महिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यशपाल तोमर ने बताया कि महिला और उसका नवजात बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं। निजी अस्पताल की इस करतूत ने चिकित्सा जैसे पेशे को शर्मशार करने का काम किया है। ज्वालापुर स्थित धीरवाली निवासी प्रेम सिंह की पत्नी की तबीयत अचानक रविवार रात को खराब हो गई। प्रेम सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी का इलाज सरकारी महिला अस्पताल में चल रहा था। इसलिए वह उसको लेकर सीधे सरकारी अस्पताल ले गया। प्रेम सिंह के अनुसार लेकिन जल्दबाजी में वह अपनी पत्नी के उपचार संबंधी कागज ले जाना भूल गया। जिस पर सरकारी अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने उपचार संबंधी कागज लाने की बात कही। लेकिन पत्नी की हालत खराब होने पर वह गर्भवती पत्नी को आर्यनगर स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए। प्रेम सिंह ने बताया कि अस्पताल की घंटी बजाने पर दो महिला स्वास्थ्य कर्मी बाहर जरूर आईं, लेकिन उन्होंने यह पूछा कि इनका उपचार हमारे अस्पताल से चल रहा था या नहीं। प्रेम सिंह ने बताया कि मेरे मना करने पर उन्होंने गेट नहीं खोला। जबकि मैंने उपचार का सभी खर्च देने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि मेरी पत्नी ने अस्पताल के गेट पर ही बच्ची को जन्म दे दिया। जिसके बाद दोनों को 108 वाहन के माध्यम से जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रेम सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी और बच्ची दोनों स्वस्थ्य हैं उनको अब किसी की कोई शिकायत नहीं करनी।
