गन्ना पर्ची कम आने से छिलाई हो रही प्रभावित
रुड़की। वसंत कालीन गन्ने की बुवाई करने में किसान तेजी से जुट गए हैं। दूसरी तरफ गन्ना खरीद पर्ची कम संख्या में आने से किसान गन्ने के खड़े खेतों को खाली नहीं कर पा रहे हैं। गन्ने की वसंत कालीन बुवाई को किसान काफी उत्तम मानते हैं। मध्य फरवरी और मार्च में बसंत कालीन गन्ने की बुवाई की जाती है। किसानों का कहना है कि वसंत कालीन बुवाई करने पर अच्छे परिणाम हासिल होते हैं। किसान हरवीर सिंह ने बताया कि अभी गन्ने की हाल ही में आई नई प्रजातियों पर ज्यादा जोर नहीं दे रहे हैं। कुछ वर्ष पहले आई गन्ने की जीरो 238 प्रजाति को ही किसान बुवाई में तरजीह दे रहे हैं। कुछ किसान बरसों पुरानी परंपरागत विधि से ही गन्ने की बुवाई कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर किसान गन्ने की नई ट्रेंच विधि से बुवाई कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करने पर उत्पादन काफी हद तक बढ़ जाता है। दूसरी तरफ चीनी मिल द्वारा गन्ना समिति के माध्यम से जारी की जाने वाली गन्ना खरीद पर्ची कम संख्या में मिलने से किसान परेशान हैं। किसान नेता अरविंद राठी का कहना है कि चीनी मिल जान बूझकर गन्ना इंडेंट कम जारी कर रहे हैं। इससे गन्ना छिलाई प्रभावित हो रही है और अगली फसल की बुवाई करने को समय से खेत खाली नहीं हो पा रहे हैं।
