जन सहयोग के बिना नशा मुक्ति और टीबी से मुक्ति असंभव: रावत
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में दिव्यांग मुक्त उत्तराखंड शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर में 2 से 11 अक्तूबर तक दिव्यांगों को कृत्रिम अंग बनाकर वितरित किये जायेंगे। रविवार को परमार्थ निकेतन में दिव्यांग मुक्त उत्तराखंड शिविर का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि हमारा प्रयास है कि दो वर्षों में उत्तराखंड को टीबी से मुक्त प्रदेश बना देंगे तथा हम वर्ष 2024 तक नशा मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में अग्रसर है। परन्तु यह कार्य बिना जन सहयोग के सम्भव नहीं हो सकता। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आगामी दो वर्षों में उत्तराखंड राज्य को दिव्यांग मुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को सहानुभूति नहीं सहयोग चाहिये, उन्हें भीख नहीं बल्कि भाव चाहिये और बेटियों को सामान नहीं सम्मान और उड़ान देने की जरूरत हैं। हमें मिलकर दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में लाना होगा। कहा कि परमार्थ निकेतन और महावीर सेवा सदन कोलकाता के संयुक्त तत्वाधान में सिंघवी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रायोजित इस शिविर के माध्यम से 2 से 11 अक्तूबर तक दिव्यांगों को कृत्रिम अंग बनाकर वितरित किये जायेंगे। इसके पहले भी दोनों संगठनों द्वारा विगत माह नेत्र चिकित्सा शिविर के माध्यम से 5 हजार से अधिक रोगियों को चश्मे और निःशुल्क दवाइयां वितरित की गई थीं। 10 और 11 अक्तूबर को भी निशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया जा रहा हैं। मौके पर राष्ट्र मन्दिर के अजय भाई, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती, महावीर सेवा सदन से विनोद बागरोडिया, आभा बागरोडिया आदि उपस्थित रहे।
