कर्ज में डूबे पंजाब को मिली आप सरकार

नई दिल्ली

भगत सिंह के गांव में एक समारोह में भगवंत मान ने पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। ष्आपष् ने पहली बार पंजाब में सत्ता संभाली है। एक नजर पंजाब के हालात और नई सरकार की चुनौतियों पर पंजाब सरकार लंबे समय से कई वित्तीय संकटों से गुजर रही है। सबसे बड़ी समस्या राज्य सरकार पर बढ़ता कर्ज का बोझ है। पिछले कई सालों से राज्य सरकार कर्ज पर कर्ज लेती जा रही है और उस पर बकाया कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 में उस पर 2,000 अरब रुपयों से भी ज्यादा कर्ज बकाया था। कई जानकारों का मानना है कि इस समय यह आंकड़ा बढ़ कर करीब 2,800 अरब रुपये हो गया है। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है। इस लिहाज से भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पंजाब का चौथा स्थान है। इस सूची में भी पंजाब के ऊपर जम्मू और कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड हैं, जो सभी पंजाब से छोटे राज्य हैं। वित्तीय संकट यानी बड़े राज्यों में पंजाब इस मोर्चे पर पहले स्थान पर है। माना जाता है कि हर साल राज्य सरकार की आधी कमाई तो इस कर्ज का ब्याज चुकाने पर ही खर्च हो जाती है। यही कारण है कि राज्य सरकार अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश नहीं कर पाती। निवेश नहीं होगा तो रोजगार के अवसर उत्पन्न नहीं होंगे, और यह पंजाब की दूसरी बड़ी समस्या है। एनएसओ के मुताबिक 2019-20 में पंजाब में 7.4 प्रतिशत बेरोजगारी दर थी, जबकि उस समय राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 4.8 थी। राज्य के लाखों बेरोजगार युवा बस सरकारी नौकरियों की राह देखते रहते हैं और कई सालों तक उनके लिए परीक्षाएं देते रहते हैं।

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