श्री साईं सैल मंगलम कालेज है या पशुओं का बाडा?
सिंगरौली ।
जिले के कोयलांचल क्षेत्र मोरवा में बतौर प्राइवेट कालेज के रूप में संचालित श्री साई सैल मंगलम कॉलेज किसी पशुओं के बाड़ा से कम नहीं नजर आता है।इसमें कॉलेज के छात्रों को बैठने के लिए कमरे तो दूर परिसर में खड़े होने की पर्याप्त जगह भी नहीं है। इसका नाम भले ही लंबा चौड़ा हो और साई बाबा के नाम पर आप आकर्षित हो जाये लेकिन इसकी बिल्डिंग देख शायद ही आपको कॉलेज जैसा लग पाए। इसके जर्जर घर के पास आते ही कही आप पशुओं का बाड़ा समझ कर वापस नहीं लौट जाए।
जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से लगभग 26 किमी दूर स्थित श्री साई सैल मंगलम कॉलेज को संचालित हुए लगभग 8 से 10 साल होने जा रहा है। बताया जाता है कि उच्च शिक्षा विभाग और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा द्वारा इसे निजी कॉलेज के तौर पर चलाने की अनुमति तो दी गई, लेकिन उक्त कॉलेज प्रबंधन छात्रों के भविष्य के साथ मनमानी और खिलवाड़ तो करता आ रहा है लेकिन उच्च शिक्षा विभाग और एपीएस यूनिवर्सिटी रीवा के नियमों व शर्तों का भी सरेआम उल्लंघन करता आ रहा है। बताया जाता है कि उक्त कालेज प्रबंधन द्वारा यूनिवर्सिटी को जिस तरह से शपथ पत्र में कालेज भवन दिखा कर कालेज चला रहा है शायद वह भवन कॉलेज भवन व परिसर के कतई योग्य है ही नहीं है।लेकिन कॉलेज प्रबंधन यूनिवर्सिटी प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग के आखों में सरेआम धूल झोंक रहा है या फिर यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मेदार आँख पर पट्टी व कान में तेल डालकर सो रहे हैं। यानी उक्त कॉलेज प्रबंधन की मनमानी के आगे यूनिवर्सिटी व उच्च शिक्षा विभाग के नियम कानून दम तोड़ रहे हैं।
प्रदेश के सिंगरौली जिले में संचालित श्री साई सैल मंगलम कालेज में विषय विशेषज्ञों के प्राध्यापक व सहायक प्राध्यापक मौके पर उपलब्ध हो, अधिकांश कागजों में ही बताए जाते हैं। यही नहीं जहाँ कॉलेज चल रहा है वह भी भाड़े का शीट नुमा घर है, जिसे एग्रीमेंट पर लिया गया है।जबकि उच्च शिक्षा विभाग व यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक दो या तीन साल बाद निजी कालेज संचालन के लिए उस समिति की अपनी जमीन और स्वयं का भवन होना चाहिए। लेकिन उक्त कालेज प्रबंधन यूनिवर्सिटी प्रशासन को लगातार गुमराह कर रहा है।
बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी व उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जिले की लीड कालेज के प्राचार्य को निजी कॉलेजों के संचालन में कमियों और नियमों की अनदेखी के लिए समय -समय पर या वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर जानकारी देते रहने निर्देशित किया है लेकिन लीड कॉलेज की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
