सुरक्षा की दृष्टि से कई प्रतिबंधों का भी करना होता है पालन

मथुरा।

भगवान श्रीकृष्ण की प्राकट्य स्थली पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का साक्षी बनने की ललक हर किसी के मन में रहती है। इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं की भीड बहुत अधिक होती है। ऐसे मंे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी आप के उत्सव के आनंद को और बढा सकती हैं और आपको कई तरह की परेशानियों से बचा सकती हैं।

सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि देश विदेश से पधारने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जन्मभूमि के सभी संपर्क मार्गों पर जूताघर एवं सामान घर की व्यवस्था की गई है। सभी आवश्यक स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के सुगम प्रवेश को दृष्टिगत रखते हुए लाउडस्पीकर के माध्यम से निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही बैरीकेडिंग इस प्रकार की जा रही है जिससे श्रद्धालु कम से कम समय में दर्शन प्राप्त कर सकें। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं का प्रवेश गोविन्द नगर द्वार यानी गेट नम्बर तीन से होगा एवं निकास मुख्य द्वार यानी गेट नम्बर एक से होगा। श्री शर्मा ने अनुरोध किया है कि सभी श्रद्धालु जन्मभूमि के लिए प्रस्थान करते समय अपने आवश्यक सामान जैसे मोबाइल फोन, कैमरा, रिमोट की रिंग, थैला, माचिस, बीडी, सिगरेट, तम्बाकू, चाकू, ब्लेड आदि अन्य कोई भी इलेक्ट्रानिक सामान अपने साथ न लाएं। इन्हें या तो अपने वाहन में, अपने ठहरने के स्थान पर अथवा मार्ग में बने सामान घर में जमा कर रशीद अवश्य प्राप्त कर लें। श्री शर्मा ने आगे बताया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान विगत वर्षों की भांति चार स्थानों पर सामान और जूता घर का संचालान करेगा। यह सामान घर रूपम सिनेमा, गोविन्द नगर थाने के सामने, श्रीगर्तेश्वर मंदिर तिराह तथा श्रीराधा पार्क पर बनाए जाएंगे। प्रत्येक सामान और जूता घर के साथ आपातकालीन स्थिति में श्रद्धालुओं को प्राथमिक चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी के सहयोग से सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के परिसर में सुगम और निर्बाध प्रवेश को दृष्टिगत रखते हुए संस्थान द्वारा गोविंद नगर के श्रीगर्तेश्वर महादेव तिराहे पर सेवा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। जहां संस्थान के पदाधिकारी श्रद्धालुओं की मदद के लिए मौजूद रहेंगे। संस्थान द्वारा बिछुडे हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने के लिए जन्मस्थान के गेट नम्बर एक के समीप आयुर्वेद भवन प्रांगण में खोया पाया केन्द्र बनाया जा रहा है। खोया पाया केन्द्र से मंदिर के चारों और लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गई है। जिससे खोया पाया केन्द्र की व्यवस्था सुचारू चल सके।

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