भगवान विष्णु हैं जगत के पालनहार: महंत दुर्गेशानंद सरस्वती

हरिद्वार

कुम्भ मेले के पावन अवसर पर आनंद वन क्षेत्र हरिपुर कलां स्थित अहलुवालिया फार्म हाउस में विक्रमजीत एवं सुदर्शना अहलुवालिया के संयोजन में विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ मानव कल्याण आश्रम के परमाध्यक्ष महंत दुर्गेशानंद सरस्वती महाराज, भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट के सचिव आई डी शास्त्री एवं नगर निगम हरिद्वार में भाजपा पार्षद दल के उपनेता अनिरूद्ध भाटी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मानव कल्याण आश्रम के परमाध्यक्ष महंत दुर्गेशानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं इसी कारण श्रीहरि का एक नाम विशम्भर भी है और श्रीविष्णु महायज्ञ भगवान लक्ष्मी नारायण की प्रसन्नता के लिए किया गया अनुष्ठान हैं। भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट के सचिव आईडी शास्त्री ने कहा कि पूज्य गुरु देव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज एवं स्वामी अखंडानंद जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित किया गया विष्णु महायज्ञ विश्व के समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए आयोजित किया गया है जो इस कुम्भ पर्व में श्रेष्ठ कार्य है। विष्णु महायज्ञ के सूत्रधार आचार्य डा. चन्द्रभूषण मिश्र ने कहा कि सृष्टि के मूल में यज्ञ है पुरूष सुक्त और श्री सुक्त से जब सोलह हजार आहुतियां यज्ञ भगवान को प्रदान की जाएगी उससे जो पुण्य प्राप्त होगा वह लोक कल्याणकारी होगा। नगर निगम हरिद्वार में भाजपा पार्षद दल के उपनेता अनिरूद्ध भाटी ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानो से जहां देवता प्रसन्न होते हैं वहीं यजमान के पित्र भी तृप्त होते हैं। विक्रमजीत एवं सुदर्शना अहलुवालिया ने अपने माता पिता स्व. कर्म चंद एवं शांति देवी के निमित्त विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया है वह उनकी आत्मा की शांति का कारक बनेगा। विष्णु महायज्ञ जहां आयोजकों के लिए कल्याणकारी है वहीं सर्व समाज के लिए भी विघ्न विनाशक सिद्ध होगा। विष्णु महायज्ञ के यजमान विक्रमजीत एवं सुदर्शना अहलुवालिया ने संतजनों के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि हमारे पूर्व जन्म के पुण्य फलीभूत हुए हैं जो हमें विष्णु महायज्ञ आयोजित करने और कुम्भ मेले में गंगा स्नान, संत दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर लाल माता मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास, पार्षद विनीत जौली, वरिष्ठ भाजपा नेता राजपाल नेगी, समाजसेवी संजय वर्मा, दिव्यम् यादव आदि उपस्थित रहे।

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